प्रेसवार्ता में सक्ती जिले के विकास की रूपरेखा
बताई, ग्रामीण खेलों को प्रोत्साहित करने की अपील
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने भेंट-मुलाकात अभियान के अंतर्गत सक्ती जिले के हसौद में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि आम जनता को योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नए जिले में काम की अपार संभावनाएं हैं, आपको संतोष होगा कि जिले को मैंने स्थापित किया है।
सक्ती जिले का विकास तेजी से करेंगे। हाल ही में जांजगीर-चांपा जिले से अलग होकर सक्ती नया जिला बना है। इससे यहां के लोगों की बरसों पुरानी मांग पूरी हो गई उन्होंने कहा कि अब सक्ती जिले का विकास तेजी से होगा। इस जिले के विकास में पैसों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि बारिश का मौसम लगभग बीत चुका है। अब पुराने स्कूलों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। स्कूलों की मरम्मत और रख-रखाव के लिए मैंने 500 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसी तरह सड़कों के निर्माण और मरम्मत का काम भी अब युद्ध स्तर पर शुरू हो जाएगा। हमने दिसंबर तक सभी सड़कों को दुरुस्त कर लेने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण और मरम्मत का काम पूरी गुणवत्ता के साथ करने के निर्देश मैंने अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर से धान खरीदी का काम भी हम शुरु कर रहे हैं। इस बार बारदानों की कमी नहीं होगी।
पिछले साल हमने 98 लाख मीटरिक टन धान खरीदा था। इस साल यह आंकड़ा 01 करोड़ मीटरिक टन से भी पार होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि मैंने अधिकारियों से कहा है कि किसानों को धान बेचने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, वे किसानों को पैरादान के लिए प्रेरित करें, ताकि किसानों को अपने खेतों में पैरा न जलाना पड़े, दान में मिले पैरा का उपयोग गौठानों में पशुओं के चारे के रूप में तथा जैविक खाद के निर्माण के लिए किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इसी महीने 17 तारीख को राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की एक और किश्त का वितरण कर दिया जाएगा। इस तरह दीपावली से पहले लगभग 1900 करोड़ रुपए की राशि बाजार में आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि बीते पौने चार वर्षों के दौरान हमने विभिन्न न्याय योजनाओं के माध्यम से डेढ़ लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि का अंतरण वंचित वर्ग के लोगों के बैंक खातों में सीधे किया है। खेल-परंपराएं हमारी संस्कृति से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई हैं। ये परंपराएं ग्रामीण स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई हैं। लुप्त हो रही इन परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन बहुत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 6 अक्टूबर से शुरू हुआ है जो 6 जनवरी 2022 तक चलेगा, इसके अंतर्गत 6 स्तरों में 14 तरह की खेल स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं।मेरी आप सभी से अपील है कि लोग ज्यादा से ज्यादा इस आयोजन का हिस्सा बनें और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएं। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे इन खेल स्पर्धाओं का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार कर हमारी ग्रामीण प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ाएं।










