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UPI से पेमेंट करने वालों के लिए बड़ा अपडेट, संसद से पास हुआ नया कानून, क्या भविष्य में देना पड़ेगा चार्ज? जानिए पूरी सच्चाई

UPI Transaction Bill:   लोकसभा ने एक अहम संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद केंद्र सरकार को भविष्य में यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अभी से यूपीआई के जरिए भुगतान करने पर कोई शुल्क देना होगा। फिलहाल देशभर में यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

नए प्रावधान के तहत सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि समय, जरूरत और परिस्थितियों को देखते हुए वह तय कर सके कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लागू किया जाए और किन्हें इससे बाहर रखा जाए।

आखिर क्या होता है MDR, जिसे लेकर शुरू हुई चर्चा?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो किसी व्यापारी, दुकान या सेवा प्रदाता को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को देना पड़ता है। अभी तक क्रेडिट और डेबिट कार्ड के कई लेनदेन पर यह शुल्क लागू है, जबकि यूपीआई और कुछ अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों को इससे छूट मिली हुई है।

नए कानून के बाद यह छूट स्थायी नहीं मानी जाएगी। सरकार जरूरत पड़ने पर भविष्य में नीति बनाकर किसी भी डिजिटल भुगतान माध्यम पर MDR लागू करने या छूट जारी रखने का फैसला कर सकेगी।

क्या यूपीआई यूजर्स को जेब से देने होंगे अतिरिक्त पैसे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर भविष्य में यूपीआई पर MDR लागू होता है तो क्या ग्राहकों से भी पैसा वसूला जाएगा। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार MDR का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि व्यापारी करता है। इसलिए यदि भविष्य में भी यूपीआई पर MDR लागू किया जाता है, तो उसका सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।

हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि व्यापारी अपनी अतिरिक्त लागत की भरपाई करने के लिए सामान या सेवाओं की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष आर्थिक असर देखने को मिल सकता है।

सरकार ने बताया क्यों जरूरी था यह बदलाव

सरकार का कहना है कि यह संशोधन डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम है। बैंक और डिजिटल पेमेंट सेवा देने वाली कंपनियां लंबे समय से यह मांग कर रही थीं कि बिना किसी शुल्क के पूरी व्यवस्था का संचालन करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार के पास संतुलित नीति बनाने का विकल्प होना जरूरी है।

सिर्फ UPI ही नहीं, निवेश और टेक्नोलॉजी से जुड़े नियमों में भी बदलाव

इस संशोधन विधेयक में केवल डिजिटल भुगतान से जुड़े प्रावधान ही शामिल नहीं हैं। सरकार ने डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं में निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कई नियमों को सरल बनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य तकनीकी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है।

फिलहाल UPI यूजर्स के लिए राहत की खबर

मौजूदा स्थिति में यूपीआई से भुगतान करने वाले लोगों के लिए किसी भी तरह का नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। यानी आम उपभोक्ता पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकते हैं। भविष्य में किसी भी तरह का बदलाव लागू करने का फैसला सरकार अलग से करेगी।