छत्तीसगढ़ : विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए 136 बिंदुओं पर सरकार को घेरा। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने करीब एक घंटे तक सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ढाई वर्ष के कार्यकाल में सरकार लगभग हर मोर्चे पर विफल रही है और राज्य में फैसले किसी ‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर लिए जा रहे हैं।
भाषण की शुरुआत में वैचारिक मुद्दों पर हुआ टकराव
भूपेश बघेल ने अपने संबोधन की शुरुआत भाजपा विधायक अजय चंद्राकर की उस टिप्पणी से की, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को लेकर बयान दिया गया था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके वैचारिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं। इस दौरान अजय चंद्राकर ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए उनके आरोपों पर आपत्ति जताई, जिस पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर चल रही है सरकार
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार बनने से पहले ही एक अदृश्य शक्ति राज्य के प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित कर रही थी। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि आखिर सरकार किसके निर्देशों पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को लेकर भी साधा निशाना
भाजपा विधायक सुनील सोनी की टिप्पणी के जवाब में भूपेश बघेल ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का बचाव करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व का पूरी दुनिया सम्मान करती थी। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणियां कीं।
धान खरीदी और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उनके अनुसार किसानों को रकबा निर्धारण, धान खरीदी और भंडारण जैसी समस्याओं के कारण लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदा गया धान खुले में भीग रहा है और कई जगह अब भी संग्रहण केंद्रों में पड़ा हुआ है।
खाद संकट को लेकर लगाए गंभीर आरोप
भूपेश बघेल ने कहा कि किसानों को समय पर डीएपी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे उन्हें बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार पहले कृत्रिम कमी पैदा करती है और बाद में किसान अधिक कीमत चुकाने को मजबूर होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को यूरिया के बजाय अन्य उर्वरकों की ओर धकेला जा रहा है।
कृषि मंत्री ने किया आरोपों का खंडन
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और कांग्रेस केवल किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। इसके जवाब में भूपेश बघेल ने उर्वरकों के उपयोग और उपलब्धता से जुड़े कई सवाल उठाए।
किसानों के साथ धोखा करने का आरोप
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं कर रही है। उन्होंने वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की योजना पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कितने किसानों को प्रोत्साहन राशि मिली। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती थी।
राशन और जनकल्याण योजनाओं पर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण लाखों लोगों को राशन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कोरोना काल में जरूरतमंदों तक घर-घर राशन पहुंचाया था, जबकि मौजूदा सरकार बुनियादी सेवाएं भी सुचारु रूप से उपलब्ध नहीं करा पा रही है।
सप्लीमेंट्री बजट नहीं लाने पर भी सरकार घिरी
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार ने अनुपूरक बजट पेश नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि या तो राज्य के पास संसाधनों की कमी है या फिर केंद्र से अपेक्षित राशि नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से कई योजनाओं और स्थानीय निकायों के भुगतान प्रभावित हो रहे हैं।
वित्त मंत्री ने दिया जवाब
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार नियोजित वित्तीय प्रबंधन के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब भी अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होगी, विधायिका की अनुमति लेकर बजट लाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र से राज्य को मिलने वाली राशि नियमित रूप से प्राप्त हो रही है।
कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा
भूपेश बघेल ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सीतापुर, बलौदाबाजार और अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में विफल रही है। उन्होंने कुछ मामलों में सीबीआई जांच की मांग का भी समर्थन किया।
महादेव एप, नकली खाद और अवैध कारोबार पर लगाए आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने महादेव एप, नकली खाद के मामलों और अवैध गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई मामलों में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है।
पेसा कानून और जंगल संरक्षण पर भी उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने कहा कि पेसा कानून को लागू करने का श्रेय कांग्रेस सरकार को जाता है। उन्होंने तमनार, हसदेव और बस्तर क्षेत्र में जंगलों की कटाई और खनन गतिविधियों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है।
नक्सलवाद पर साझा प्रयासों का किया उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद में आई कमी का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसका श्रेय केवल मौजूदा सरकार को नहीं दिया जा सकता। उनके अनुसार इस दिशा में पूर्ववर्ती सरकारों ने भी लगातार काम किया है।
बीमा, स्वास्थ्य और दवा खरीद पर भी सरकार को घेरा
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि फसल बीमा कंपनियां हर साल किसानों से हजारों करोड़ रुपये का लाभ कमा रही हैं, जबकि किसानों को अपेक्षित फायदा नहीं मिल रहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, मेकाहारा अस्पताल की स्थिति और दवा खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार सरकार जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर विफल रही है।
सरकार के इस्तीफे की मांग
अपने संबोधन के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्र सरकार की नीतिगत विफलताओं का प्रमाण है। उन्होंने दावा किया कि जनता के हितों की अनदेखी करने वाली सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है और उसे तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।











