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धर्म कभी घृणा की बात नहीं कर सकता, कहा मुख्यमंत्री बघेल ने

मुख्यमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत

आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 23 जुलाई शनिवार को स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। विवेकानंद विद्यापीठ, रायपुर द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है।
शुभारंभ पर विवेकानंद विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने राज्यगीत और देशभक्ति पूर्ण गीत की संगीतमय प्रस्तुति दी।कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रामकृष्ण आश्रम,राजकोट के अध्यक्ष स्वामी निखिलेश्वरानंद ने की। वहीं संसदीय सचिव विकास उपाध्याय कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि थे।
विवेकानंद विद्यापीठ के सचिव डॉ. ओमप्रकाश वर्मा ने स्वागत भाषण में आयोजन पर प्रकाश डाला व अतिथियों का स्वागत किया।

आयोजन में उपस्थित जनसमुदाय

इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं के आदर्श हैं। छत्तीसगढ़ से विवेकानंद जी का गहरा लगाव रहा है। कलकत्ता के बाद स्वामी विवेकानंद जी ने रायपुर में सबसे ज्यादा समय बिताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए रायपुर एयरपोर्ट का नाम विवेकानंद के नाम पर रखने के लिए विधानसभा में एक अशासकीय संकल्प लाया था। विवेकानंद युवाओं से कहा करते थे कि अच्छे स्वास्थ्य, अच्छे चरित्र का निर्माण हो, साथ ही एक लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ने की बात वह करते थे।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने कहा आप किसी भी पद्धति से प्रार्थना करिए या पूजा करें आप एक ही ईश्वर तक पहुंचेंगे। आप किसी भी रास्ते से चलिए आप पहुंचेंगे एक ही जगह पर। उन्होंने समानता और जोड़ने की बात कही, यही हिंदुस्तान की ताकत है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि सब को जोड़ने की बात यदि किसी संत ने कही है तो वह रामकृष्ण परमहंस ने कहीं और उस बात को चरितार्थ करने का काम यदि किसी ने किया तो विवेकानंद की
स्वामी विवेकानंद ने कहा कि पश्चिम के विज्ञान तो हमें स्वीकार करना होगा और भारत के आध्यात्म को पश्चिम को स्वीकार करना होगा।
उन्होंने कहा कि आजकल राजनीति करने वाले धर्म की बात कर रहे हैं और धार्मिक गुरु चुप बैठे हुए हैं। हम हिंदू हैं हमें इस बात पर गर्व है लेकिन कोई बात का यह मतलब नहीं हम किसी और धर्म का अपमान करें। धर्म कभी घृणा की बात नहीं कर सकता। साधु संत के दो काम जगत कल्याण और आत्म उन्नति है। यदि आपके मन में घृणा है तो आप साधु नहीं हैं।