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366 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल…अंबिकापुर में परियोजना पर सियासी संग्राम तेज

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स में शामिल राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वर्षों से निर्माणाधीन यह परियोजना अब केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा विषय बन चुकी है। अस्पताल भवन के अधूरे रहने से मरीजों, मेडिकल छात्रों और पूरे क्षेत्र को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

अस्पताल निर्माण में देरी पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

अस्पताल भवन के निर्माण में लगातार हो रही देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सरगुजा दौरे पर पहुंचे प्रदेश के वित्त मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने परियोजना की धीमी रफ्तार के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में विभागों के बीच समन्वय की कमी और नेतृत्व स्तर पर असहमति के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना तय समय में पूरी नहीं हो सकी। मंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है और निर्माण एजेंसी को तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

टीएस सिंहदेव का जवाब, बोले- ढाई साल में क्या बदला?

वित्त मंत्री के आरोपों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने पलटवार करते हुए भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार को सत्ता संभाले ढाई वर्ष से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अस्पताल निर्माण को लेकर अपेक्षित प्रगति अब तक दिखाई नहीं दे रही है।सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई, अस्पताल भवन निर्माण शुरू हुआ और पीजी पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी कराई गई थी। उनके अनुसार वर्तमान सरकार को अब निर्माण कार्य पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।

करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अधूरी है परियोजना

अस्पताल भवन के निर्माण पर अब तक करीब 366 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो पाई है। अतिरिक्त बजट की जरूरत, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण यह परियोजना अपनी निर्धारित समय सीमा से काफी पीछे चल रही है।यह स्थिति लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर रही है कि आखिर इतने बड़े निवेश के बाद भी अस्पताल भवन पूरी तरह तैयार क्यों नहीं हो पाया।

मेडिकल छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा सीधा असर

निर्माण कार्य लंबित रहने का सबसे बड़ा असर मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों को पूरा करने में संस्थान को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।फिलहाल जिला अस्पताल को संबद्ध अस्पताल के रूप में उपयोग किया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था मेडिकल शिक्षा के सभी आवश्यक मानकों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही है।

दो बार जीरो ईयर घोषित होने से बढ़ी चिंता

अस्पताल भवन समय पर तैयार नहीं होने का नुकसान मेडिकल छात्रों को भी उठाना पड़ा है। कॉलेज को दो बार जीरो ईयर का सामना करना पड़ा, जिससे एमबीबीएस विद्यार्थियों की क्लिनिकल ट्रेनिंग और व्यावहारिक शिक्षा प्रभावित हुई।विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल का जल्द शुरू होना बेहद जरूरी है।

मरीजों को भी नहीं मिल पा रहा आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे का लाभ

अस्पताल भवन के अधूरे रहने से सरगुजा संभाग के हजारों मरीज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। यदि यह परियोजना पूरी हो जाती है तो क्षेत्र के लोगों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी और बड़े शहरों की निर्भरता कम होगी।

जनता पूछ रही है सबसे अहम सवाल

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा प्रश्न अब भी अनुत्तरित है। आखिर वर्षों से निर्माणाधीन यह अस्पताल भवन कब पूरा होगा और सरगुजा की जनता को इसका पूरा लाभ कब मिलेगा?मरीजों, छात्रों और स्थानीय नागरिकों की उम्मीदें इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य को गति देकर इसे धरातल पर कब तक पूरी तरह उतारा जाता है।