तेहरान। मॉस्को में रूस और ईरान ने बुधवार को एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत ईरान में छोटे परमाणु संयंत्र (स्मॉल न्यूक्लियर पावर प्लांट्स) बनाए जाएंगे। यह समझौता रूसी परमाणु संस्था रोसाटॉम के प्रमुख अलेक्सी लिखाचेव और ईरान के परमाणु प्रमुख तथा उपराष्ट्रपति मोहम्मद इस्लामी के बीच हुआ।
रोसाटॉम ने इसे ‘रणनीतिक परियोजना’ करार दिया। इस्लामी ने बताया कि तेहरान की योजना 2040 तक 20 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन की है, जिसके लिए 8 परमाणु संयंत्र बनाए जाएंगे। गौरतलब है कि इस समय ईरान में 1 गीगावाट का केवल एक परमाणु संयंत्र है। बुशहर में स्थित संयंत्र को रूस ने बनाया था।
गौरतलब है र्कि ईरान अब अपने मिसाइल ठिकानों को दोबारा खड़ा करने में जुट गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि तेहरान ने पारचिन और शाहरोद ठिकानों पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, जहां मिसाइल ईंधन बनाने के लिए ज़रूरी मिक्सिंग प्लांट तबाह कर दिए गए थे। ईरान की प्राथमिकता अब ठोस ईंधन वाली मिसाइलों पर है।
ईरान परमाणु बम नहीं बनाएगा: राष्ट्रपति
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने साफ कहा कि तेहरान कभी भी परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं करेगा। उन्होंने यह बयान ऐसे समय दिया है जब ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसकी 30 दिन की समयसीमा 27 सितंबर को खत्म हो रही है। इस पहल को ‘स्नैपबैक’ प्रतिबंध कहा जाता है। पेज़ेश्कियन ने जोर देकर कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।
भारत ने ईरान पर मतदान से किया परहेज
भारत का रुख ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संतुलित और रणनीतिक है। भारत ने 2005 में आइएईए में ईरान के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन 2024 में उसने ईरान के खिलाफ प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया, यह दर्शाता है कि वह अमरीका, इजरायल और ईरान दोनों पक्षों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित करना चाहता है।














