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CG Morning News : CM साय का आज दुर्ग और बेमेतरा दौरा… नेता प्रतिपक्ष महंत ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र… जनगणना का पहला चरण पूरा… पढ़ें और भी खबरें

CG Morning News : रायपुर. मुख्ममंत्री विष्णु देव साय आज दुर्ग और बेमेतरा के कार्यक्रमों में शामिल होंगे. सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री निवास में ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुनेंगे. इसके बाद दोपहर 12:30 बजे दुर्ग पहुंचकर सुशासन तिहार कार्यक्रम में शामिल होंगे. यहां जनसमस्या निवारण शिविर में भाग लेने के साथ विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे. दोपहर 3 बजे सुशासन तिहार के तहत समीक्षा बैठक भी लेंगे. शाम 6 बजे मुख्यमंत्री बेमेतरा जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना और विकास कार्यों के भूमिपूजन-लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रात 9 बजे तक रायपुर लौटेंगे.

सामूहिक कन्या विवाह में विधायक दीपेश भी लेंगे सात फेरे
रायपुर. बेमेतरा विधायक दीपेश साहू आज सात फेरे लेंगे. उनकी शादी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में होगी. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई मंत्री और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे. विधायक दीपेश साहू 23 अन्य जोड़ों के साथ विवाह बंधन में बंधेंगे. सादगीपूर्ण विवाह को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज है.

बेमेतरा दौरे पर रहेंगे उपमुख्यमंत्री साव
रायपुर. डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव आज बेमेतरा जिले के दौरे पर रहेंगे. वे दोपहर 1 बजे रायपुर से रवाना होकर 2:30 बजे मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम में शामिल होंगे. कार्यक्रम के बाद शाम 7:30 बजे रायपुर लौटेंगे.

नेता प्रतिपक्ष महंत का राष्ट्रपति को पत्र
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी परिवारों के अधिकारों के हनन पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को एक अर्धशासकीय पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. राष्ट्रपति को सौंपे गए पत्र में डॉ. महंत ने उल्लेख किया है कि अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी, वन अधिकार की मान्यता अधिनियम, 2006 पूरे भारत में दिसंबर 2007 से प्रभावी है. इस कानून की धारा 3(1) (घ) के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, वन भूमि पर स्थित जलक्षेत्रों में मछली पालन और जलग्रहण क्षेत्रों के अन्य उत्पादों के उपयोग का हकदार या सामुदायिक अधिकार पत्र स्थानीय पात्र व्यक्तियों को दिया जाना चाहिए. अत्यंत खेद का विषय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले 18 वर्षों में भी इस महत्वपूर्ण प्रावधान का मकसद नहीं किया जा सका है.

ठेका प्रथा से मजदूर बनने को मजबूर हुए मूल निवासी

डॉ. महंत ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य की वन भूमि पर लगभग 1,58,000 हेक्टेयर का विशाल जलक्षेत्र स्थित है. इन जलक्षेत्रों में मछली पालन और मत्स्याखेट के जरिए 50,000 से अधिक अनुसूचित जनजाति और अन्य वन निवासी परिवार अपनी जीविका चलाते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ शासन की वर्तमान मछली नीति वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के पूरी तरह विपरीत है. कानून का उल्लंघन करते हुए राज्य के इन जलक्षेत्रों को पट्टे पर और 1000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों को निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित करके ठेकेदारों को सौंप दिया जाता है. इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि जिन बड़े जलाशयों पर स्थानीय आदिवासियों और वन निवासियों का सामुदायिक अधिकार होना चाहिए था, वहां वे बाहरी ठेकेदारों के अधीन महज मजदूर के रूप में काम करने को मजबूर हैं.

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और पारंपरिक वन निवासियों के आर्थिक एवं कानूनी हितों की रक्षा के लिए वन अधिकार अधिनियम को तत्काल प्रभाव से क्रियान्वित कराया जाए. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि हजारों परिवारों को उनका वास्तविक हक मिल सके. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि देश के सर्वोच्च कार्यालय से निर्देश प्राप्त होने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्य सचिव इस विषय की गंभीरता को समझेंगे.

जनगणना का पहला चरण पूरा
रायपुर. छत्तीसगढ़ में चल रही जनगणना के पहले चरण में पहली बार घर-घर की सुविधाओं और संसाधनों का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है. 1 मई से शुरू हुई जनगणना के पहले चरण का 95 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो गया है और 30 मई को यह चरण समाप्त हो जाएगा. प्रदेश में जनगणना के लिए 48,742 ब्लॉक बनाए गए थे. इसी आधार पर प्रदेश में 85 लाख से अधिक मकानों का आंकड़ा सामने आया है. जनगणना का दूसरा चरण अगले साल 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा. पहले चरण में कई मकानों में ताला बंद होने के कारण उनकी गणना नहीं हो पाई. उन मकानों को बंद दर्शाया गया है. अंतिम दिन प्रगणक ने दौरा कर उन मकानों की स्थिति अपडेट की. उल्लेखनीय है कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया पहली बार डिजिटल माध्यम से की जा रही है.