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रायपुर में पहली बार जैन मुनि बने आचार्य, ऐतिहासिक समारोह में उमड़ा आस्था का सैलाब

 रायपुर। राजधानी के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय ‘आचार्य पदारोहण, सहस्रावधान एवं तपस्या महोत्सव’ का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर रायपुर ने एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए पहली बार किसी जैन मुनि के आचार्य पद पर प्रतिष्ठित होने का गौरव प्राप्त किया।

71 वर्ष की आयु और दीक्षा जीवन के 50 वर्ष पूर्ण होने पर परम पूज्य गणाधीश पंन्यास प्रवर श्री विनयकुशल मुनि जी गणि महाराज को जैन परंपरा के सर्वोच्च आचार्य पद से अलंकृत किया गया। इस प्रतिष्ठा के साथ वे अब गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनचंद्रसूरिश्वर जी महाराज के रूप में जिनशासन का नेतृत्व करेंगे।

तप, त्याग और साधना का मिला सर्वोच्च सम्मान

कच्छ क्षेत्र में जन्मे और महान संत श्री जयानंद मुनिजी महाराज के शिष्य रहे विनयकुशल मुनि जी ने देशभर के जैन संघों के आग्रह पर यह दायित्व स्वीकार किया। वे श्री मोहनलालजी म.सा. समुदाय के प्रथम आचार्य बने हैं। समाज ने इसे उनके दीर्घकालीन तप, ज्ञान, विनय और गुरुभक्ति का सर्वोच्च सम्मान बताया।

देशभर के संतों और श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति

समारोह में श्री जिन पीयूष सागर सूरिश्वर जी महाराज के पावन सानिध्य में श्री जिनसम्यक रत्न सागर सूरिश्वर जी महाराज सहित 41 साधु-साध्वियों ने सहभागिता की। तपस्वी सम्राट विरागमुनि जी और राष्ट्रसंत नेपाल केसरी मणिभद्र ने भी अपने संदेशों के माध्यम से नव आचार्य को शुभकामनाएं दीं।

देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं और विभिन्न जैन संघों ने इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनकर नव आचार्य का अभिनंदन किया।

ओम बिरला बोले—आचार्य पद समाज को दिशा देने का दायित्व

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आचार्य पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान और समाज को सही मार्ग दिखाने की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर और जैन दर्शन के सिद्धांत आज भी पूरी मानवता के लिए शांति, अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम का संदेश देते हैं।

उन्होंने 14 वर्षीय शतावधानी बाल मुनि हंसभद्र मुनि जी महाराज की विलक्षण स्मरण शक्ति और ज्ञान की भी सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा—छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पहली बार छत्तीसगढ़ की धरती पर आयोजित यह आचार्य पदारोहण समारोह पूरे प्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने देशभर से आए संतों का स्वागत करते हुए कहा कि इस आयोजन से प्रदेश में आध्यात्मिक चेतना का नया वातावरण बना है।

मुख्यमंत्री ने 14 वर्षीय हंसभद्र मुनि द्वारा प्रस्तुत सहस्रावधान की अद्भुत क्षमता की प्रशंसा करते हुए इसे असाधारण उपलब्धि बताया।

जैन संतों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जैन संत अपने तप, संयम और त्यागपूर्ण जीवन से समाज को निरंतर प्रेरित करते हैं। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि इतना बड़ा आध्यात्मिक आयोजन प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और इससे समाज में नैतिक मूल्यों एवं अध्यात्म की भावना और मजबूत होगी।

जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी मौजूदगी

समारोह में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, दुर्ग सांसद विजय बघेल, जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, बस्तर सांसद महेश कश्यप, रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत सहित अनेक जनप्रतिनिधि और देशभर से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान पूरे परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।