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शरीर से नहीं, जज़्बे से जीता मुकाबला… दिव्यांग शिवा राव ने मिस्टर छत्तीसगढ़ बॉडीबिल्डिंग में जीता सिल्वर मेडल

रायपुर। जीत पैरों से नहीं, हौसलों से चलकर मिलती है… रायपुर के 21 वर्षीय शिवा राव ने इस पंक्ति को अपनी मेहनत और जज़्बे से साकार कर दिखाया है। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि सीमाएं शरीर में हो सकती हैं, लेकिन सपनों और इरादों की कोई सीमा नहीं होती।

दुर्ग जिले के भिलाई में आयोजित मिस्टर छत्तीसगढ़ बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में शिवा राव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता में कई सक्षम प्रतिभागियों के बीच मंच पर उतरना ही अपने आप में बड़ी चुनौती थी, लेकिन शिवा ने आत्मविश्वास और कड़ी तैयारी के दम पर जजों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी फिटनेस, मसल कंट्रोल और मंच पर प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया।

पिछले सात वर्षों से वे लगातार अभ्यास कर रहे हैं। सुबह की शुरुआत वर्कआउट से होती है और दिन का बड़ा हिस्सा जिम में पसीना बहाते हुए गुजरता है। सख्त डाइट, अनुशासन और नियमित ट्रेनिंग उनकी दिनचर्या है। कई बार शारीरिक तकलीफें और थकान ने उन्हें परखा, लेकिन उन्होंने कभी हार मानने का विकल्प नहीं चुना।

भिलाई की इस बड़ी उपलब्धि के बाद अब तक वे कुल 9 मेडल अपने नाम कर चुके हैं। अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हर पदक उनके संघर्ष और निरंतर प्रयास का प्रमाण है।

यह सफर आसान नहीं था। परिस्थितियां कई बार चुनौती बनकर सामने आईं, लेकिन हर कठिन दौर में उन्होंने खुद को यही याद दिलाया कि जीत हालात से नहीं, हौसलों से तय होती है। इस उपलब्धि के पीछे उनके पिता ए. सीमांचल का अटूट साथ और माता ए. सीता की प्रेरणा सबसे बड़ी ताकत रही है। माता-पिता के विश्वास और प्रोत्साहन ने उन्हें कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। विशेष रूप से उनकी माता की प्रेरणा ने उन्हें हर मुश्किल में आगे बढ़ने का संबल दिया।

21 वर्ष की उम्र में, जहाँ कई युवा अपने भविष्य की दिशा तय कर रहे होते हैं, वहीं शिवा राव ने अपनी एक अलग पहचान गढ़ ली है। वे सिर्फ पदक जीतने वाले खिलाड़ी नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो परिस्थितियों के कारण खुद को सीमित समझ बैठते हैं। अब उनका लक्ष्य और बड़ा है। वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटे हैं और उनका सपना है कि वे वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन करें।