स्लम क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर होंगे विकास कार्य
सरकार ने सभी नगरीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्र की स्लम और पुरानी झुग्गी बस्तियों का सर्वे कर प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद वहां मूलभूत सुविधाओं के विस्तार का काम शुरू किया जाएगा। साथ ही जिन सरकारी आवासों में गरीब परिवारों का पुनर्वास किया गया है, वहां रखरखाव, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और जलभराव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है।
स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं पर रहेगा विशेष जोर
निर्देशों के अनुसार स्लम बस्तियों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, मरम्मत और नियमित रखरखाव कराया जाएगा, ताकि लोगों को स्वच्छ और उपयोगी सुविधाएं मिल सकें।
पुरानी आवासीय परियोजनाओं का होगा कायाकल्प
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘गरीबों की सेवा निधि’ का बड़ा हिस्सा आईएचएसडीपी, बीएसयूपी और अन्य पुरानी शासकीय आवासीय योजनाओं के तहत बने मकानों के रखरखाव, मरम्मत और उन्नयन पर खर्च किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि वर्षों पहले बनाए गए आवासों को फिर से रहने योग्य और सुरक्षित बनाया जा सके।
कानूनी प्रावधानों के तहत होगा फंड का उपयोग
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सेवा निधि का उपयोग छत्तीसगढ़ नगरपालिका निगम अधिनियम 1956 की कंडिका 128-ग तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की कंडिका 117-ग के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। कॉलोनाइजरों से ‘गरीबों की सेवा निधि’ मद में प्राप्त राशि केवल गरीबों के जीवन स्तर में सुधार और उनके हित से जुड़े कार्यों पर ही खर्च की जा सकेगी।
गड़बड़ी पर तय होगी जवाबदेही
सरकार ने फंड के उपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि सेवा निधि के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।