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महिला सुरक्षा पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, दुष्कर्म मामलों में मानसिक पीड़ा को माना गंभीर अपराध का आधार

 बिलासपुर :  महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर हाईकोर्ट का एक बेहद अहम और सख्त फैसला सामने आया है। अदालत ने अपने टिप्पणी में कहा कि भारतीय समाज में दुष्कर्म जैसी घटना किसी भी महिला की गरिमा और आत्मसम्मान को गहराई से प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति में उत्पन्न मानसिक पीड़ा और सामाजिक दबाव कई बार पीड़िता को आत्महत्या जैसे कदम तक ले जा सकता है।

बलौदाबाजार के पुराने मामले में आरोपी की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

यह टिप्पणी बलौदाबाजार भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में वर्ष 2004 में हुए एक दुष्कर्म और आत्महत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। हाईकोर्ट ने आरोपी विजय कुमार वर्मा की ओर से दायर आपराधिक अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 वर्ष की कठोर सजा को बरकरार रखा है।

2004 की घटना, सूने घर में हुई वारदात और फिर सामने आया दर्दनाक मोड़

जानकारी के अनुसार 22 अगस्त 2004 को पीड़िता घर में अकेली थी, क्योंकि उसके परिजन खेत में काम करने गए हुए थे। इसी दौरान आरोपी ने घर में घुसकर कथित रूप से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

इसी बीच जब पीड़िता का भाई घर लौटा तो उसने आरोपी को मौके पर देखा और उसे पकड़ने की कोशिश की। घटना के बाद पीड़िता मानसिक रूप से बेहद आहत हो गई और उसने आत्मदाह कर अपनी जान दे दी। अस्पताल ले जाते समय उसने अपने बयान में घटना की जानकारी भी दी थी।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी 10 साल की सजा, तीन धाराओं में दोषी करार

मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया गया था।

हाईकोर्ट ने खारिज की प्रेम संबंध की दलील, साक्ष्यों को माना निर्णायक

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान आरोपी की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि घटनास्थल से मिले साक्ष्य, विशेषकर फटे हुए कपड़े, यह स्पष्ट करते हैं कि पीड़िता ने खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया था। कोर्ट ने प्रेम प्रसंग की थ्योरी को भी आधारहीन बताया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा ऐसे मामलों में किसी तरह की नरमी संभव नहीं

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपी का कृत्य ही पीड़िता की आत्महत्या का प्रत्यक्ष कारण था। अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में किसी भी प्रकार की उदारता स्वीकार नहीं की जा सकती।

आरोपी को दो महीने में आत्मसमर्पण का निर्देश, जमानत भी रद्द

हाईकोर्ट ने आरोपी की मुचलका जमानत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है और उसे दो महीने के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले को महिला सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी माना जा रहा है।