CG Police Constable Promotion Case: छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में लगाई गई रोक को अभी भी बरकरार रखा है। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 9 जुलाई को तय की गई है।
कोरबा के 73 कॉन्स्टेबलों की याचिका पर सरकार ने दिया जवाब
इस केस में कोरबा जिले के 73 कॉन्स्टेबलों ने याचिका दाखिल की है। पिछली सुनवाई 19 मई 2026 को हाईकोर्ट ने प्रमोशन प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा था। 15 जून की सुनवाई में सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया है, हालांकि एक अन्य संबंधित मामले में अभी भी जवाब दाखिल किया जाना बाकी है।
एक जैसे मामलों की संयुक्त सुनवाई की संभावना
जानकारी के अनुसार प्रदेश के एक अन्य जिले से जुड़ा मामला भी इसी तरह की ट्रांसफर और वरिष्ठता नीति से संबंधित है। दोनों याचिकाएं लगभग समान प्रकृति की हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि 9 जुलाई को दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई हो सकती है।
क्या है पूरा विवाद, सीनियरिटी को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण लेकर आए कॉन्स्टेबलों को उनकी मूल नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता दी जा रही है। जबकि नियमों के अनुसार स्वेच्छा से ट्रांसफर लेने वाले कर्मचारियों को नए जिले की वरिष्ठता सूची में नीचे रखा जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि सीधी भर्ती से नियुक्त आरक्षकों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और वरिष्ठता व्यवस्था नियमों के अनुसार तय होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने पहले ही जताई थी प्रक्रिया में खामियां
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर पदोन्नति प्रक्रिया में खामियों की बात स्वीकार करते हुए आदेश जारी करने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, कोर्ट ने प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी थी लेकिन अंतिम आदेश पर रोक बरकरार रखी गई है।
लंबे समय से असमंजस में पुलिस विभाग, हजारों जवान प्रभावित
इस मामले के चलते पूरे पुलिस विभाग में प्रमोशन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कोरबा ही नहीं बल्कि प्रदेश के हजारों आरक्षकों की नजर अब 9 जुलाई की सुनवाई और कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।
कोरबा के 73 याचिकाकर्ता आरक्षक, पूरी सूची में विविध अनुभव और तैनाती
कोरबा जिले के 73 पुलिसकर्मियों ने इस याचिका में हिस्सा लिया है, जिनमें पुलिस लाइन, थाना, ट्रैफिक और स्पेशल ब्रांच सहित विभिन्न इकाइयों में तैनात आरक्षक शामिल हैं। उनका दावा है कि वरिष्ठता नियमों के गलत क्रियान्वयन से उनके प्रमोशन अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।











