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नया रायपुर में गौण खनिज पट्टेदारों का मौन विरोध, NOC में देरी से खदानें बंद होने की कगार पर, प्रदेशभर के पट्टेदार चिंतित

नया रायपुर। छत्तीसगढ़ में गौण खनिज पट्टों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। प्रदेशभर के गौण खनिज पट्टेदारों ने अचानक पर्यावरण भवन, नया रायपुर स्थित प्रदेश कार्यालय पहुंचकर मौन विरोध दर्ज कराया। बिना पूर्व सूचना पहुंचे पट्टेदार जमीन पर बैठकर अधिकारियों का इंतजार करते रहे, जिससे प्रशासनिक हलचल तेज हो गई।

गौरतलब है कि पहले जिलास्तरीय पर्यावरण समाधान समिति के माध्यम से पट्टा अवधि तक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया जाता था, लेकिन हाल में Supreme Court of India के एक आदेश के बाद सभी पट्टेदारों को प्रदेश स्तरीय समिति से पुनः अनापत्ति लेने का निर्देश जारी हुआ। प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रदेश कमेटी के अधीन तीन सहायक समितियां भी गठित की गईं, लेकिन समय सीमा में निर्णय नहीं हो पाने से हजारों प्रकरण लंबित हो गए। स्थिति ऐसी बनी कि प्रदेश की कई गौण खनिज खदानें बंद होने की कगार पर पहुंच गईं।

तीन बार मिला स्थगन, फिर भी समाधान नहीं
प्रदेश गौण खनिज पट्टेदार महासंघ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से तीन बार स्थगन आदेश प्राप्त कर समयावधि बढ़वाई, ताकि लंबित मामलों का निराकरण हो सके। बावजूद इसके पर्यावरण विभाग की कथित उदासीनता के चलते तीन वर्ष बाद भी अधिकांश प्रकरण लंबित हैं। पट्टेदारों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश में गौण खनिज की कमी से निर्माण कार्य और रोजगार पर बड़ा असर पड़ेगा।

अधिकारियों ने दिया आश्वासन
देर शाम प्रदेश कमेटी चेयरमैन के प्रतिनिधि अधिकारी पांडेय मौके पर पहुंचे और सभी उप समितियों में समन्वय स्थापित कर प्रकरणों के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बाद पट्टेदार धरना स्थल से उठे और इंद्रावती सचिवालय में खनिज संचालक से मिलने रवाना हुए।

पट्टेदारों की पीड़ा
प्रदेश संघ के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे कागजी कार्रवाई में उलझे हैं, जिससे व्यवसाय करना कठिन होता जा रहा है। उनका आरोप है कि शासन के बिजली, जीएसटी, माइनिंग और पर्यावरण संबंधी नए-नए नियमों के कारण संचालन जटिल हो गया है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी इस व्यवसाय से जुड़ी है, ऐसे में शासन को व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। इस विरोध में महासचिव पराग बड़े सहित विजय अग्रवाल, अशोक सिंह राजपूत, भूपेंद्र बंसल, सुभाष पांडे, शैलेश तिवारी, मनिंदर गरचा, गोविंद पटेल, झाला रामचंद्राकार, दीप कुमार अग्रवाल, फगेंद्र यादव, जसवीर सिंह चावला, धमतरी से नहाता, जगदलपुर से बाफना समेत सैकड़ों पट्टेदार शामिल रहे।