कबीरधाम: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों में इन दिनों “धर्म वापसी” अभियान लगातार चर्चा में बना हुआ है। खासकर पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में इस अभियान को लेकर स्थानीय राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में नई हलचल देखने को मिल रही है। पंडरिया विधायक भावना बोहरा की सक्रियता ने इस पहल को बड़ी पहचान दिलाई है।
इसी क्रम में कबीरधाम जिले के वनांचल ग्राम बूचीपारा में आयोजित एक घर वापसी कार्यक्रम में विधायक भावना बोहरा ने करीब 100 आदिवासी परिवारों के लोगों की अपने मूल धर्म में वापसी कराई। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने पूर्व में अन्य धर्म अपना लिया था। कार्यक्रम के दौरान विधायक ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ लोगों का सम्मान किया। उन्होंने लौटने वाले लोगों के “पैर पखार” कर उनका स्वागत किया तथा उपहार भेंट कर सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक भावना बोहरा ने कहा कि वर्षों से वनांचल क्षेत्रों में गरीब और अशिक्षित आदिवासियों को लालच, भ्रम और विभिन्न प्रलोभनों के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि अब समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल धार्मिक पहचान की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म वापसी का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
जानकारी के अनुसार, विधायक भावना बोहरा अब तक विभिन्न गांवों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से 650 से अधिक आदिवासियों की घर वापसी करा चुकी हैं। वे लगातार गांव-गांव पहुंचकर सनातन परंपरा, आदिवासी संस्कृति और धार्मिक पहचान को लेकर संवाद कर रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान केवल धार्मिक या सामाजिक पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारतीय जनता पार्टी की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि धर्म वापसी अभियान के जरिए भावना बोहरा वनांचल क्षेत्रों में अपनी अलग राजनीतिक और सामाजिक पहचान मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं।
वनांचल इलाकों में इस अभियान को लेकर लोगों के बीच समर्थन और चर्चा दोनों देखने को मिल रही है। आने वाले समय में इसका असर क्षेत्रीय राजनीति और चुनावी समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।









