गंभीर बीमारियों के इलाज के सिस्टम
में बदलाव किया छत्तीसगढ़ सरकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज के सिस्टम में पहली बार बड़ा सुधार करते हुए 9 जिलों में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अलग से क्रिटिकल केयर यूनिट बनाने की तैयारी है। हर यूनिट 23 करोड़ रुपए में बनेगी, यानी क्रिटिकल केयर का प्रदेशव्यापी इंफ्रास्ट्रक्चर 207 करोड़ रुपए का होगा। इन क्रिटिकल केयर यूनिट्स में गंभीर बीमारियों के अलावा रोड एक्सीडेंट, आगजनी जैसे हादसों में गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा।
इसके लिए हर एक क्रिटिकल केयर ब्लॉक में 50-50 बेड होंगे। क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने के लिए जिन 9 जिलों का चयन किया गया है, उनमें दुर्ग, राजनांदगांव,अंबिकापुर, सूरजपुर, रायगढ़, जशपुर, गरियाबंद, जगदलपुर और कोंडागांव के नाम हैं। इनकी स्वास्थ्य विभाग की निर्माण एजेंसी सीजीएमएससी की ओर से टेंडर प्रक्रिया अंतिम दौर में है।
अगले कुछ दिनों में चुने हुए 9 जिलों में जमीनी प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत केंद्र सरकार की ओर से 60 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से 40 प्रतिशत की राशि वहन की जाएगी।
तीन नए मेडिकल कालेजों के भवन बनेंगे 975 करोड़ रु में

प्रदेश के तीन नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों कांकेर, महासमुंद और कोरबा की नई बिल्डिंग के लिए प्रशासकीय सहमति मिल चुकी है। करीब 325-325 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेजों के नए भवन बनाए जाने हैं। इसमें कॉलेज की बिल्डिंग, लैब, छात्र छात्राओं के हॉस्टल, स्टॉफ के आवासीय परिसर के साथ यहां मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल को अपग्रेड भी किया जाएगा।
यही नहीं मरीजों के इलाज के लिए 100-100 बिस्तरों की अतिरिक्त व्यवस्था भी बनाई जाएगी। तीनों मेडिकल कॉलेजों की जमीनों का चिन्हांकन कर लिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक कांकेर और महासमुंद में नए भवनों का निर्माण कार्य भी इस साल के अंत से पहले शुरु कर दिया जाएगा।
जिला अस्पतालों में अलग भवन

क्रिटिकल केयर ब्लॉक चुने हुए 9 जिलों के जिला अस्पतालों में ही अलग भवन में होगा। इसके लिए एडवांस उपकरण खरीदे जाएंगे, जो इसी यूनिट में रहेंगे। आक्सीजन प्लांट जैसे बंदोबस्त कोरोनाकाल में हो चुके हैं। दरअसल कोरोनाकाल के अनुभव पर ही दूरस्थ इलाकों में क्रिटिकल केयर पर फोकस किया जा रहा है। सभी जिलों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को राजधानी में समय-समय पर क्रिटिकल केयर की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। गंभीर मरीजों को रायपुर नहीं लाना पड़े, इसलिए दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर सूरजपुर, रायगढ़, जशपुर, गरियाबंद, जगदलपुर और कोंडागांव में ऐसे यूनिट
गंभीर मरीजों को रायपुर नहीं लाना होगा रायपुर

छत्तीसगढ़ के दक्षिणी कोने बीजापुर-सुकमा तथा उत्तरी हिस्से के बलरामपुर, सरगुजा और कोरिया तथा आसपास के जिलों में किसी गंभीर मरीज को हायर सेंटर में रिफर करने की जरूरत हो तो रायपुर के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इन इलाकों से ही रायपुर की दूरी औसतन साढ़े 4 सौ से 5 सौ किमी तक है। अभी स्थिति यह है कि प्रदेश के हर क्षेत्र से बीमार या हादसों में गंभीर मरीजों को रायपुर ही लाना पड़ रहा है और इसमें काफी समय लगता है।
ऐसे में मरीज को आपात इलाज नहीं मिल पाता। इसलिए प्रदेश में अलग-अलग सेंटर में क्रिटिकल केयर यूनिट बनाई जा रही है, ताकि गंभीर मरीजों को नजदीक में बेहतर इलाज मिल जाए। इसके लिए चुने गए 9 जिलों की भौगोलिक स्थिति यह है कि सभी आसपास के डेढ़ सौ किमी तक के एरिया को कवर कर लेंगे। इस तरह, रेफर होने के बाद गंभीर मरीज दो-ढाई घंटे में ही हायर सेंटर में इलाज के लिए पहुंच जाएगा।
रायपुर के यूनिट में 100 बेड

क्रिटिकल केयर में नए-नए सुधारों के लिए राजधानी के डॉ. अंबेडकर अस्पताल में 30 करोड़ की लागत से क्रिटिकल केयर रिसर्च सेंटर भी बनाया जाएगा। यह पं. जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर रिसर्च इंस्टीट्यूट से संबद्ध रहेगा। इसमें ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू के साथ 100 बेड होंगे।
हर यूनिट पर खर्च
16.63 करोड़ भवन निर्माण में
07.12 करोड़ उपकरण, मशीनें
50 बिस्तर मरीजों के लिए
…जल्दी इलाज मिले
हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए क्रिटिकल केयर पर काम कर रहे हैं। इससे दूरस्थ इलाकों से मरीजों को रायपुर आने की जरूरत नहीं पड़े और गंभीर मरीजों के ट्रीटमेंट में कम से कम समय खराब होगा।
-टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री










