देश ने दिया पद्म सम्मान, इस
उम्र में भी रहती हैं बेहद सक्रिय
चेन्नई। 110 वर्षीय ‘वृक्षम्मा’ सालुमारदा थिममक्का करोड़ों लोगों के लिए एक मिसाल हैं। जिन्होंने अपना जीवन पेड़ पौधों के लिए समर्पित कर दिया। सालुमारदा कर्नाटक के रमनगारा जिले की रहने वाली हैं। उनकी उम्र लगभग 110 बताई जाती है। जो एक पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
बुजुर्ग सालुमारदा उस समय चर्चा में आईं जब उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया।
दरअसल, उन्होंने अपनी जिन्दगी में 8000 से अधिक पौधारोपण किये हैं। उनके पति ने भी उनके इस सराहनीय काम में उनकी मदद की थी।
जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दोनों ने अपने घर के पास बने हाईवे पर हजारों की तादाद में पेड़ लगाए। वे पति-पत्नी कुएं से मटके में पानी भर के उन पेड़ों की सिचाई करते थे।
राष्ट्रपति ने सम्मानित किया पद्मश्री से
मानद डाक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी

पद्म सम्मान का गौरवान्वित क्षण
‘वृक्षम्मा’ सालुमारदा द्वारा लगाए गए कुछ पौधे अब एक विशाल वृक्ष बन चुके हैं। कुछ की उम्र तो 70 साल से भी ज्यादा की हो गई है। सालुमारदा ने सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर पेड़ों की कटाई के खिलाफ आवाज भी उठाई थी।
वे पेड़ों से बहुत ही प्रेम करती हैं, जो हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी होते हैं। वे उनसे एक मां की तरह प्यार करती हैं। कभी कभी तो पेड़ों के गले भी लगती हैं।
उनके इस अटूट प्रेम को देखते हुए उन्हें ‘वृक्षाम्मा’ का नाम दिया गया। मदर्स ऑफ ट्री सालुमारदा को साल 2017 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
उस वक्त उनकी उम्र 107 वर्ष थी। यह सम्मान उनको पेड़ों के प्रति उनकी ममता को देखते हुए दिया गया था। बुजुर्ग सालुमारदा को कर्नाटक सेंट्रल विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है।
औलाद नहीं हुई तो अवसाद में चले
गई, फिर पौधों को मान लिया परिवार

हमेशा रेखांकित होता रहेगा वृक्षम्मा का योगदान
बता दें, ‘वृक्षम्मा’सालुमारदा थिमक्का को शादी के काफी समय तक कोई औलाद नहीं हुई। जिसकी वजह से वह अवसाद में चली गईं। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने ख़ुदकुशी करने का सोच रही थीं। फिर उन्होंने अपने पति के साथ पेड़ पौधों की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। उसके बाद उन्होंने 8000 से ज्यादा पौधारोपण किया।
सालुमारदा ने अपने घर के हाईवे पर करीब 4 किमी तक के इलाके को हरा भरा कर दिया है। जिससे होकर गुजरना लोगों को बड़ा सुकून देता है। उन्होंने पेड़ पौधे में अपने जीवन का सुख खोज लिया। आज दुनिया उन्हें ‘वृक्षम्मा’ के नाम से जानती हैं। इसके लिए उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है।








