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शराब घोटाले मामले में ईडी ने रायपुर-भिलाई में दी दबिश, इनके यहां चल रही दस्तावेजों की जांच…

Chhattisgarh

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय ईडी की कार्रवाई लगातार चल रही है। जानकरी के अनुसार ईडी की टीम ने नेहरु नगर भिलाई, रायपुर के शैलेन्द्र नगर,और सदर में नाहटा बिल्डिंग में दबिश दी है। इसमें नेहरु नगर के ठिकाने पर तो ईडी सशस्त्र महिला जवानों को साथ लिया है। बता दे कि नेहरु नगर के हवाला और शराब कारोबार के निकटवर्ती की पत्नी ने ईडी के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई है। सूत्रों की मानें तो भिलाई में स्मृति नगर और नेहरु नगर फतेहपुरिया और सिंह के यहां दबिश दी गई हैं. मंगलवार को जिनके ठिकानों पर ईडी ने दबिश दी है, उनमें रवि बजाज, सुमित मालू और भिलाई के रहने वाले अरविंद सिंह शामिल हैं। इन सभी के ठिकानों पर ईडी की टीम सर्चिंग कर रही है।

दरअसल, ईडी ने अपनी जांच शुरू की तो पता चला कि छतीसगढ़ में इंडस्ट्री एंड कॉमर्स डिपार्टमेंट में ज्वॉइंट सेक्रेटरी अनिल टूटेजा इस पूरे नेटवर्क को अनवर ढेबर के साथ मिलकर चला रहा है. इन दोनों के राज्य के बड़े नेताओं और दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ काफी नजदीकी संबध हैं, जिसकी वजह से ये नेटवर्क बिना रो-टोक चल रहा था. अनवर ढेबर इस पूरे अवैध रिश्वत का मुख्य कलेक्शन एजेंट था जो खुद और अनिल टूटेजा के लिए 15 फीसदी हिस्सेदारी रख बाकी दूसरे लोगों के लिए रखता था.इसमें राज्य के नेता और अधिकारी शामिल हैं।

इस इनकम टैक्स को छापेमारी में सबूत मिले थे कि राज्य में बड़े नेताओं, सरकारी अधिकारी और कुछ प्राइवेट लोगों की मिलीभगत से बड़ा अवैध रिश्वत का कारोबार चल रहा है. ये कारोबार 2 हजार करोड़ से ज्यादा का है और राज्य के कई विभागों तक फैला हुआ है. यही वजह है कि रोजाना की कलेक्शन के लिए बकायदा डाटा मैनेज किया जा रहा था और एक्सेल शीट पर आपस में वॉट्सऐप पर शेयर किया जा रहा था, जिसे इनकम टैक्स ने अपनी छापेमारी में पकड़ा था।

ये है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच कर रहे ईडी ने अवर ढेबर को गिरफ्तार कर 04 दिनों की रिमांड पर रखा है। वहीं ईडी ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि अनवर ने राजनीतिक पहुंच का लाभ उठाकर बड़ा आपराधिक सिंडिकेट बना रखा था, और उसके जरिए कई बड़े आबकारी अफसरों और विपणन संघ से साठगांठ कर सरकारी शराब की बिक्री के समानांतर उन्हीं दुकानों में अवैध शराब की बिक्री, सप्लायरों व डिस्टीलरी, बॉटल कंपनियों आदि से कमीशन आदि के जरिए 03 सालों में 2000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई है।