बिलासपुर: जिले में सर्पदंश की दो अलग-अलग घटनाओं में 6 साल की बच्ची और 10 साल के बच्चे की जान चली गई। दोनों मामलों में परिजन बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। एक सप्ताह के भीतर सर्पदंश से यह दूसरी मौत सामने आई है।
बिस्तर में छिपे करैत ने 10 साल के बच्चे को डसा
पहली घटना तोरवा थाना क्षेत्र के ढेका गांव के नयापारा की है। यहां चंद्रकुमार चंद्राकर का 10 वर्षीय बेटा गौरव सोमवार रात खाना खाने के बाद सोने के लिए बिस्तर पर गया था। इसी दौरान बिस्तर में छिपे करैत सांप ने उसे डस लिया।सर्पदंश के बाद गौरव घबरा गया और रोते हुए अपनी मां को इसकी जानकारी दी। परिजन बिना देर किए उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर बच्चे को सिम्स में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
कोटा क्षेत्र में 6 साल की बच्ची ने भी दम तोड़ा
दूसरी घटना कोटा थाना क्षेत्र के बिल्लीबंद गांव की बताई जा रही है। यहां 6 साल की बच्ची को सांप ने डस लिया था। सर्पदंश के बाद परिजन उसे कोटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। प्रारंभिक उपचार के बाद बच्ची की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे सिम्स रेफर कर दिया।सिम्स में बच्ची का उपचार किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
दो महीने में सर्पदंश के 47 मरीज पहुंचे सिम्स
सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के मुताबिक, पिछले दो महीनों में सर्पदंश के 47 मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें अधिकांश मरीजों को समय रहते अस्पताल लाए जाने के कारण इलाज से बचाया जा सका।चिकित्सकों के अनुसार बारिश के मौसम में सांप सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में घरों के भीतर भी पहुंच सकते हैं। ऐसे में बिस्तर, कपड़े, जूते और घर के अंधेरे हिस्सों की जांच करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
झाड़-फूंक में समय न गंवाने की सलाह
सिम्स प्रबंधन ने सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवाने से बचने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि सांप के काटने के बाद मरीज को शांत रखें और उसे जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर स्थिति में भी मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।











