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परीक्षा के बाद 48 घंटे के अंदर खाली करना होगा हॉस्टल: छात्रावास अधीक्षक के आदेश से छात्रों की बढ़ी चिंता

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के वीर सावरकर बालक छात्रावास के अधीक्षक की ओर से एक आदेश जारी किया गया है, जिसने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। उस आदेश में लिखा है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों को 48 घंटे के अंदर हॉस्टल का कमरा खाली करना होगा। छात्रों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सामान रखने के लिए सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

चीफ वार्डन-असिस्टेंट वार्डन की सहमति से पत्र जारी
छात्रों की माने, तो चीफ वार्डन और असिस्टेंट वार्डन की सहमति से पत्र जारी किया गया है, जिसमें लिखा है कि वीर सावरकर बालक छात्रावास में निवासरत छात्रों को सूचित किया जाता है कि सत्र 2025-26 के परीक्षा उपरांत ग्रीष्म कालीन अवकास में छात्रावास छोड़ने के समय अपनी समस्त सामाग्री अपने साथ ले जाएंगे। साथ ही जाने से पूर्व कमरे का ताला खोलकर केयर टेकर से कक्ष में उपलब्ध सामाग्री का सत्यापन कराकर एवं मेस वेंडर से NO DUES कराकर छात्रावास में जमा करेंगे। उसके पश्चात ही छात्रावास छोड़ेंगे। एक और पत्र में आगे लिखा कि छात्रावास में निवासरत छात्रों को सूचित किया जाता है कि छात्रावास नियमानुसार छात्र परीक्षा समाप्त होने के 48 घंटे के अंदर छात्रावास छोड़ दें।

छात्रों में असमंजस की स्थिति
ऐसे में वे छात्र सबसे ज्यादा परेशान हैं, जिनका घर दूसरे जिलों या फिर राज्यों में है और जिनके पास शहर में रहने या सामान रखने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। कई छात्रों ने बताया कि यदि उनके मित्र भी केवल हॉस्टल में रहने वाले हों और बाहर कोई परिचित न हो, तो वे अपना सामान आखिर कहाँ रखें। परीक्षा समाप्ति के बाद तुरंत घर जाना हर छात्र के लिए संभव नहीं होता, क्योंकि कई छात्रों की ट्रेन या बस की टिकट बाद की तारीखों में होती है। कुछ छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक कार्यों के लिए भी शहर में रुकना पड़ता है।

छात्रों ने प्रशासन से क्या मांग की ?
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को कम से कम अस्थायी रूप से कॉमन रूम या स्टोर रूम की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका यह भी कहना है कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य छात्रों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें असमंजस और परेशानी में डालना। छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सामान रखने के लिए सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराये।