Advertisement Carousel

लद्दाख में हिंसा ने लिया सियासी मोड़, कड़ी सुरक्षा के बीच करगिल में सभाओं पर रोक, 50 हिरासत लोग में

नई दिल्ली। लद्दाख में बुधवार को भड़की हिंसा के बाद हालात गुरुवार को भी तनावपूर्ण बने रहे। लेह में कर्फ्यू जारी है और सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती की गई है। बुधवार को राज्य के दर्जे की मांग को लेकर हुए विरोध में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 80 से अधिक घायल हो गए थे। गुरुवार को मृतकों के शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिए गए।

हिंसा में शामिल होने के शक में दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है। करगिल जिला मजिस्ट्रेट ने रैलियों और सभाओं पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं, सोनम वांगचुक के संस्थान पर एफसीआरए उल्लंघन की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। पुलिस अब तक करीब 50 लोगों को पकड़ चुकी है और एक एफआईआर भी दर्ज की गई है। पूरे इलाके में दुकानें, दफ्तर और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं और शांति बहाल करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात है।

हिंसा का ‘नेपाल’ कनेक्शन : सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, लेह हिंसा में ‘नेपाल’ कनेक्शन भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि नेपाली नागरिकों व किशोरों को उपद्रव भड़काने के लिए बुलाया गया। करीब 20 से अधिक नेपाली नागरिक पुलिस की निगरानी में हैं। हिंसा में नेपाल के सात लोग घायल हुए। उच्च स्तरीय बैठक के बाद उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने इसे लद्दाख को अस्थिर करने की साजिश बताया और कहा कि इसमें राजनीतिक दल भी शामिल थे। भाजपा ने कांग्रेस पार्षद का भड़काऊ वीडियो भी जारी किया।

वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द

इस बीच, गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक के एनजीओ का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द कर दिया है। वहीं संस्थान हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ आल्टरनेटिव्स, लद्दाख (एचआईएएल) पर एफसीआरए उल्लंघन की शिकायत पर सीबीआई जांच जारी है। सोनम के एनजीओ सेकमोल के खिलाफ जल्द ही ईडी के फेमा के तहत जांच शुरू करने की संभावना है। वांगचुक के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र, एक स्विस विश्वविद्यालय और एक इटैलियन संगठन से हुए तीन सेवा समझौते विदेशी फंडिंग समझ लिए गए।

भूख हड़ताल ने क्यों भड़काई आग?… 72 वर्षीय त्सेरिंग अंगचुक व 60 वर्षीय ताशी डोल्मा 35 दिन से भूख हड़ताल पर थे। उनकी हालत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। बुधवार को आंदोलन हिंसक हो गया।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें … लद्दाख को राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का विस्तार, लेह और करगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें और रोजगार में आरक्षण-ये चार प्रमुख मांगें हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार इन मांगों पर अमल के बिना लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक पहचान खतरे में है।

हिंसा में कितना नुकसान हुआ?… घायलों में 30 पुलिसकर्मी भी हैं। भीड़ ने वाहनों और सरकारी दफ्तरों में आग लगाई, भाजपा मुख्यालय और हिल काउंसिल दफ्तर जलाए।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप.. भाजपा ने कांग्रेस पार्षद फुंटसोग स्टैंजिन त्सेपाग पर भीड़ उकसाने का आरोप लगाया। आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस ने जानबूझकर हिंसा को हवा दी।