अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद देशभर के वाहन चालकों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह की राहत नहीं मिली है। 28 जून 2026 के लिए जारी नए रेट में सरकारी तेल कंपनियों ने कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब क्रूड ऑयल सस्ता हो गया है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक कम क्यों नहीं हुईं।
28 जून को भी ईंधन की कीमतों में नहीं हुआ कोई बदलाव
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने रविवार के लिए पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए हैं। लगातार करीब एक महीने से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इससे पहले 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया था। उसके बाद से देशभर में पुराने रेट ही लागू हैं।
देश के प्रमुख शहरों में आज क्या है पेट्रोल-डीजल का भाव
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है।
चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है।
कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं नोएडा, लखनऊ, चंडीगढ़ और पटना समेत कई अन्य शहरों में भी पुराने दाम ही लागू हैं।
क्रूड ऑयल की कीमत में क्यों आई गिरावट
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 3.84 प्रतिशत टूटकर 72.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.23 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह दोनों प्रमुख बेंचमार्क में अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और 60 दिन के युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता घटी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया।
क्रूड सस्ता होने के बाद भी तुरंत क्यों नहीं घटते दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट आने का असर भारतीय बाजार में उसी दिन दिखाई नहीं देता। तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत तय करते समय पिछले 15 दिन से लेकर एक महीने तक की औसत आयात लागत को आधार मानती हैं। यही कारण है कि हालिया गिरावट के बावजूद फिलहाल पेट्रोल पंपों पर कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
क्या आने वाले दिनों में मिल सकती है राहत
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या इसमें और गिरावट आती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में सस्ता क्रूड आयात बिल कम करने के साथ महंगाई पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।











